विशेषण:
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता अर्थात उनके गुण,
दोश, रुप, आकार, संख्या आदि का बोध कराते हैं उन्हें विशेषण
करते हैं.
विशेषण जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं उन्हें विशेष
कहा जाता है.
जैसे,
1) हे मातृभूमि तेरे चरणों में शीश नवाउ
तेरे- विशेषण
चरणों- विशेष्य
2)राजा ने चारों बेटियों को गेहूं के 100 100 दाने दिए
100 100- विशेष्य
दाने- विशेषण
3) कटु वचन तो सदा बोते हैं कांटे
कटु- विशेषण
वचन- विशेष्य
विशेषण के भेद
1)गुणवाचक विशेषण: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोश, रुप, रंग,आकार आदि
का बोध कराते हैं उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं.
जैसे,
काला, हरा, लंबा, कायर, वीर आदि
1) छोटी बहन तनिक बच्ची थी
छोटी- विशेषण
2) नया ठेकेदार ईमानदार था
इमानदार- विशेषण
3) बहुमंजिला इमारत बन रही थी
बहु मंजिला- विशेषण
2) संख्यावाचक विशेषण- जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध कराते हैं
उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं
जैसे,
दो सोने के सिक्के, 7 किलोमीटर
1) 5 साल बाद राजा ने राजकुमारी को बुलाया
2) हर तीसरे दिन आ जाते हैं
3) राजा ने सभी को गेहूं के सौ- सौ दानेदिए
3) परिमाणवाचक विशेषण: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा( नापतोल) का बोध कराते हैं
उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं
जैसे,
2 मीटर कपड़ा, 4 किलो चीनी,
1) आपकी चाय में कितनी चीनी डालू?
2) डिब्बे में 1 किलो दाल है
3) मैंने आपके दिए 100 दानों से इतनी अधिक फसल तैयार की है
4) सार्वनामिक विशेषण:
जो सर्वनाम शब्द वाक्य में विशेषण का कार्य करते हैं उन्हें सार्वनामिक
विशेषण करते हैं
जैसे,
1) यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है
2) गेहूं के दाने कहां है
3) जरूर इसके पीछे कोई मकसद होगा
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